कुरान - 20:96 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

96
قَالَ بَصُرۡتُ بِمَا لَمۡ يَبۡصُرُواْ بِهِۦ فَقَبَضۡتُ قَبۡضَةٗ مِّنۡ أَثَرِ ٱلرَّسُولِ فَنَبَذۡتُهَا وَكَذَٰلِكَ سَوَّلَتۡ لِي نَفۡسِي

Transliteration: (Qaala basurtu bimaa lam yabsuroo bihee faqabadtu qabdatam min asarir Rasooli fanabaztuhaa wa kazaalika sawwalat lee nafsee)

96. वह बोला, 'मैंने वह चीज़ देखी जो लोगों ने न देखी [134], तो मैंने उस फ़रिश्ते (जिब्रील के घोड़े) के क़दम के निशान से एक मुट्ठी ख़ाक उठा ली [135], फिर उसे (सोने में) डाल दिया, और मेरे नफ़्स को यही बात अच्छी लगी [136] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 96 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 96 की तफ़सीर

"वह बोला, 'मैंने वह चीज़ देखी जो लोगों ने न देखी [134], तो मैंने उस फ़रिश्ते के क़दम के निशान से एक मुट्ठी ख़ाक उठा ली [135], फिर उसे डाल दिया, और मेरे नफ़्स को यही बात अच्छी लगी [136] ।' "

[134] सामरी का बातिनी दावा

सामरी ने अपने आप को बड़ा मुशाहिदे वाला साबित करने की कोशिश की कि मैंने हज़रत जिब्रील को देख लिया था जिसे दूसरों ने नहीं देखा था।

[135] मुक़द्दस चीज़ का नाजाइज़ इस्तेमाल

उसने जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के घोड़े के सुम की ख़ाक को बछड़े में डाला। मुक़द्दस निशानी को शिर्क के लिए इस्तेमाल करना बदतरीन गुनाह था।

[136] नफ़्सानी ख़्वाहिशात की पैरवी

उसने ख़ुद एतराफ़ किया कि यह किसी इलाही हुक्म से नहीं बल्कि उसके अपने नफ़्स की शरारत और फ़ित्ना-परवरी थी।

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