Transliteration: (Qaala fazhab fa inna laka fil hayaati an taqoola laa misaasa wa inna laka maw'idal lan tukhlafahoo wanzur ilaaa ilaahikal lazee zalta 'alaihi 'aakifaa; la nuharriqannahoo thumma la nansifannahoo fil yammi nasfaa)
"मूसा ने फ़रमाया, 'तो दूर हो जा! बेशक ज़िंदगी भर तेरी सज़ा यह है कि तू कहेगा, 'मुझे कोई न छुए' [137]; और यक़ीनन तेरे लिए एक ऐसा वादा है जो तुझसे कभी न टलेगा [138]; और अपने उस माबूद को देख जिस पर तू दिन भर जमा बैठा रहता था; हम उसे ज़रूर जला डालेंगे, फिर उसे रेज़ा-रेज़ा करके दरिया में बहा देंगे [139] ।' "
हज़रत मूसा की बद्दुआ से सामरी को ऐसा छूत का मर्ज़ और शदीद बुख़ार हुआ कि जो उसे छूता वह बीमार हो जाता और वह ख़ुद तड़पता। चुनांचे वह पूरी ज़िंदगी जंगल में "ला मिसास" (मुझे न छूना) चीख़ता फिरा।
यह दुनियावी सज़ा थी, जबकि आख़िरत में जहन्नम का दायमी अज़ाब उसका मुक़द्दर था।
हज़रत मूसा ने सोने के बछड़े को आरे से काटा, जलाया, पीसकर ख़ाक किया और दरिया में बहा दिया ताकि शिर्क की निशानी भी ज़मीन से मिट जाए।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat