Transliteration: (Qaaloo maaa antum illaa basharum mislunaa wa maaa anzalar Rahmaanu min shai'in in antum illaa takziboon)
"उन्होंने कहा: 'तुम तो हमारी ही तरह के इंसान हो [21], और रहमान ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया; तुम सिर्फ़ झूठ बोल रहे हो [22]!'"
काफ़िरों ने वही अज़ली एतराज़ किया: "तुम तो हमारे जैसे ही इंसान हो!" तारीख़ गवाह है कि हर ज़माने के काफ़िरों और बद-अक़ीदों ने अंबिया-ए-किराम की अज़मत और रूहानी मक़ाम से आंखें चुराकर उन्हें महज़ अपने जैसा आम बशर क़रार देकर गुमराह होना पसंद किया।
अंबिया का बशर होना उनकी आजिज़ी और कमाल है ताकि वे इंसानों के लिए रहनुमा बन सकें, लेकिन वे आम इंसानों की तरह नहीं होते; वे माअ़सूम, मुक़र्रब और नूरे इलाही के पैकर होते हैं।
उन्होंने मुतलक़ वह्य का इंकार कर दिया और अल्लाह के सच्चे रसूलों को झूठा कहा। तफ़सीरे रूहुल बयान में है कि उस शहर का बादशाह भी आवाम के ख़ौफ़ से ईमान न ला सका। हवारिय्यीन की तकज़ीब दर-अस्ल नबी की तकज़ीब थी, और नबी की तकज़ीब अल्लाह से बगावत है।
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