कुरान - 36:14 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
إِذۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمُ ٱثۡنَيۡنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزۡنَا بِثَالِثٖ فَقَالُوٓاْ إِنَّآ إِلَيۡكُم مُّرۡسَلُونَ

Transliteration: (Iz arsalnaaa ilaihimusnaini fakazzaboohumaa fa'azzaznaa bisaalisin faqaalooo innaaa ilaikum mursaloon)

जब हमने उनकी तरफ़ दो रसूल भेजे [17] [18], तो उन्होंने दोनों को झुठला दिया [19], फिर हमने तीसरे के ज़रिये ताक़त बख़्शी [20]; पस उन सबने कहा, "बेशक हम तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजे गए हैं!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 14

"जब हमने उनकी तरफ़ दो रसूल भेजे [17] [18], तो उन्होंने दोनों को झुठला दिया [19], फिर हमने तीसरे के ज़रिये ताक़त बख़्शी [20]; पस उन सबने कहा: 'बेशक हम तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजे गए हैं!'"

[17] रसूलों की बेअसत

अल्लाह तआला ने अहले अंताकिया की हिदायत के लिए हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के हवारियों में से दो बुज़ुर्गों (हज़रत सादिक़ और सदूक़) को रसूल बनाकर भेजा।

[18–19] कौम की तरफ़ से तकज़ीब

उस बस्ती के सरकश लोगों ने हक़ की बात मानने से इंकार कर दिया और दोनों पैग़ंबरों की तकज़ीब की और उन पर ज़ुल्म ढाना शुरू किया।

[20] तीसरे रसूल से ताक़त बख़्शना

अल्लाह तआला ने उनकी मदद और ताईद के लिए तीसरे रसूल (हज़रत शमऊन) को भेजा। तीनों ने मिलकर एक ज़बान होकर दावत दी कि हम तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ़ से भेजे गए हैं, बुतपरस्ती छोड़ो और एक ख़ुदा की इबादत करो।

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