Transliteration: (Innaa Nahnu nuhyil mawtaa wa naktubu maa qaddamoo wa aasaarahum; wa kulla shai'in ahsainaahu feee Imaamim Mubeen)
"बेशक हम मुर्दों को ज़िंदा करते हैं और जो कुछ उन्होंने आगे भेजा [13] और जो अपने पीछे निशान छोड़ गए [14] उसे लिख रहे हैं; और हर चीज़ को हमने एक रौशन किताब में गिन रखा है [15]!"
अल्लाह तआला ही मुर्दों को दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगा। आयत में फ़रमाया: 'हम लिख रहे हैं' — हालाँकि लिखने वाले फ़रिश्ते (किरामन कातिबीन) हैं, मगर अल्लाह ने इस अमल को अपनी तरफ़ मंसूब फ़रमाया ताकि आमाल की हिफ़ाज़त और उनकी अज़मत ज़ाहिर हो।
यहाँ दो क़िस्म के आमाल का इंदिराज ज़िक्र हुआ है:
'इमामे मुबीन' से मुराद लौहे महफ़ूज़ है जिसमें अज़ल से अबद तक की हर छोटी-बड़ी चीज़, हर ज़र्रे की हरकत और कायनात की पूरी तक़दीर वाज़ेह तौर पर महफ़ूज़ है।
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