कुरान - 36:10 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَسَوَآءٌ عَلَيۡهِمۡ ءَأَنذَرۡتَهُمۡ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Wa sawaaa'un 'alaihim 'a-anzartahum am lam tunzirhum laa yu'minoon)

और उनके लिए बराबर है चाहे आप उन्हें डराएं या न डराएं, वे ईमान नहीं लाएंगे [10]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 10

"और उनके लिए बराबर है चाहे आप उन्हें डराएं या न डराएं, वे ईमान नहीं लाएंगे [10]!"

[10] हक़ की तबलीग़ का दायमी अज्र

जिन बद-बातिनों के मुक़द्दर में कुफ़्र तय हो चुका है, उन पर किसी नसीहत का असर नहीं होता। लेकिन हुज़ूर ﷺ को तबलीग़ का पूरा और दायमी अज्र अल्लाह की बारगाह से मिलता रहता है। नबी का फ़र्ज़ सिर्फ़ हक़ पहुँचा देना है, किसी के दिल में ज़बरदस्ती ईमान डालना नहीं।

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