Transliteration: (Wa sawaaa'un 'alaihim 'a-anzartahum am lam tunzirhum laa yu'minoon)
"और उनके लिए बराबर है चाहे आप उन्हें डराएं या न डराएं, वे ईमान नहीं लाएंगे [10]!"
जिन बद-बातिनों के मुक़द्दर में कुफ़्र तय हो चुका है, उन पर किसी नसीहत का असर नहीं होता। लेकिन हुज़ूर ﷺ को तबलीग़ का पूरा और दायमी अज्र अल्लाह की बारगाह से मिलता रहता है। नबी का फ़र्ज़ सिर्फ़ हक़ पहुँचा देना है, किसी के दिल में ज़बरदस्ती ईमान डालना नहीं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat