कुरान - 36:9 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَجَعَلۡنَا مِنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيهِمۡ سَدّٗا وَمِنۡ خَلۡفِهِمۡ سَدّٗا فَأَغۡشَيۡنَٰهُمۡ فَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa ja'alnaa min baini aydeehim saddanw-wa min khalfihim saddan fa aghshai naahum fahum laa yubsiroon)

और हमने उनके आगे एक दीवार बना दी और उनके पीछे एक दीवार और उन्हें ऊपर से ढांप दिया, पस वे कुछ नहीं देख पाते [9]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 9

"और हमने उनके आगे एक दीवार बना दी और उनके पीछे एक दीवार और उन्हें ऊपर से ढांप दिया, पस वे कुछ नहीं देख पाते [9]!"

[9] बातिन का अंधापन और हिदायत के हिजाब

यह आयत बताती है कि मुनकिरीन के दिलों पर कुफ़्र, हसद और सरकशी के ऐसे परदे और रुकावटें पड़ चुकी हैं कि वे हक़ीक़त को देखने की सलाहियत खो चुके हैं।

शबे हिजरत का अज़ीम मौजिज़ा: जब काफ़िरों ने हुज़ूर ﷺ के काशाना-ए-अक़दस का मुहासिरा किया ताकि आपको (मआज़अल्लाह) क़त्ल कर दें, तो हुज़ूर अकरम ﷺ ने यही आयते मुबारका तिलावत फ़रमाई और एक मुट्ठी ख़ाक उनकी तरफ़ फेंकी। अल्लाह की क़ुदरत से तमाम काफ़िरों की आंखों पर परदा पड़ गया और हुज़ूर ﷺ उनके सरों पर ख़ाक डालते हुए निहायत इत्मीनान से उनके दरमियान से निकल गए और वे कुछ न देख सके!

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