कुरान - 36:65 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
ٱلۡيَوۡمَ نَخۡتِمُ عَلَىٰٓ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَتُكَلِّمُنَآ أَيۡدِيهِمۡ وَتَشۡهَدُ أَرۡجُلُهُم بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Al-Yawma nakhtimu 'alaaa afwaahihim wa tukallimunaaa aideehim wa tashhadu arjuluhum bimaa kaanoo yaksiboon)

आज हम उनके मुंहों पर मुहर लगा देंगे [96], और उनके हाथ हमसे कलाम करेंगे और उनके पांव उनके किए की गवाही देंगे [97]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 65

"आज हम उनके मुंहों पर मुहर लगा देंगे [96], और उनके हाथ हमसे कलाम करेंगे और उनके पांव उनके किए की गवाही देंगे [97]!"

[96] ज़बानों पर मुहरबंदी

महशर में जब मुशरिक़ीन अपने शिर्क और गुनाहों का झूठा इंकार करेंगे और कहेंगे कि "वल्लाहि रब्बिना मा कुन्ना मुशरिक़ीन" (बख़ुदा हम तो मुशरिक़ न थे), तो अल्लाह तआला उनकी ज़बानों को गूंगा फ़रमा कर उन पर मुहर लगा देगा ताकि वे झूठ न बोल सकें।

[97] आज़ा-ए-बदन (हाथ-पाँव) की गवाही

अल्लाह तआला के हुक्म से उनके हाथ बोलने लगेंगे और पांव गवाही देंगे कि इन्होंने दुनिया में कौन-कौन से गुनाह, ज़ुल्म और बदकारियां की थीं। इंसान के अपने ही अंग उसके ख़िलाफ़ चश्मदीद गवाह बन जाएंगे।

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