कुरान - 36:66 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
وَلَوۡ نَشَآءُ لَطَمَسۡنَا عَلَىٰٓ أَعۡيُنِهِمۡ فَٱسۡتَبَقُواْ ٱلصِّرَٰطَ فَأَنَّىٰ يُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa law nashaaa'u lata masna 'alaaa aiyunihim fasta baqus-siraata fa-annaa yubsiroon)

और अगर हम चाहते तो उनकी आँखें मिटा देते (अंधा कर देते), फिर वे रास्ते की तरफ़ दौड़ते, तो उन्हें रास्ता कहाँ सूझता [98]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 66

"और अगर हम चाहते तो उनकी आँखें मिटा देते, फिर वे रास्ते की तरफ़ दौड़ते, तो उन्हें रास्ता कहाँ सूझता [98]?"

[98] बीनाई छीन लेने पर अल्लाह की क़ुदरत

अल्लाह तआला कादिर है कि काफ़िरों की आंखों की रोशनी बिल्कुल मिटा दे और उनकी पुतलियों को बे-नूर कर दे। अगर ऐसा हो जाता तो वे अपने घरों या रास्तों की तरफ़ भागना चाहते भी तो ठोकरें खाते और उन्हें कोई राह न मिलती। यह इंसान को दी गई बीनाई की अज़ीम नेमत का अहसास दिलाना है।

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