कुरान - 36:68 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
وَمَن نُّعَمِّرۡهُ نُنَكِّسۡهُ فِي ٱلۡخَلۡقِۚ أَفَلَا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa man nu 'ammirhu nunakkishu fil-khalq; afalaa ya'qiloon)

और जिसे हम लंबी उम्र देते हैं, उसे पैदाइश में (कमज़ोरी की तरफ़) उलट देते हैं [100]; तो क्या वे अक़्ल नहीं रखते? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 68

"और जिसे हम लंबी उम्र देते हैं, उसे पैदाइश में उलट देते हैं [100]; तो क्या वे अक़्ल नहीं रखते?"

[100] बुढ़ापे में कमज़ोरी और तग़य्युरे हाल

इंसान बचपन से जवानी की तरफ़ क़ूवत और तवानाई पाता है, लेकिन जब अल्लाह उसे लंबी उम्र देता है, तो उसकी ताक़त को घटाकर दोबारा बच्चों की तरह कमज़ोर, बे-बस और दूसरों का मोहताज बना देता है।

बाल सफ़ेद हो जाते हैं, नज़र कमज़ोर हो जाती है, क़ूवत जवाब दे जाती है। यह इस बात की खुली दलील है कि इंसान किसी चीज़ का मुस्तक़िल मालिक नहीं, बल्कि सब कुछ अल्लाह की मर्जी के ताबे है। जो ज़ात इंसान को पलट सकती है, वही उसे दोबारा ज़िंदा भी कर सकती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now