Transliteration: (Wa man nu 'ammirhu nunakkishu fil-khalq; afalaa ya'qiloon)
"और जिसे हम लंबी उम्र देते हैं, उसे पैदाइश में उलट देते हैं [100]; तो क्या वे अक़्ल नहीं रखते?"
इंसान बचपन से जवानी की तरफ़ क़ूवत और तवानाई पाता है, लेकिन जब अल्लाह उसे लंबी उम्र देता है, तो उसकी ताक़त को घटाकर दोबारा बच्चों की तरह कमज़ोर, बे-बस और दूसरों का मोहताज बना देता है।
बाल सफ़ेद हो जाते हैं, नज़र कमज़ोर हो जाती है, क़ूवत जवाब दे जाती है। यह इस बात की खुली दलील है कि इंसान किसी चीज़ का मुस्तक़िल मालिक नहीं, बल्कि सब कुछ अल्लाह की मर्जी के ताबे है। जो ज़ात इंसान को पलट सकती है, वही उसे दोबारा ज़िंदा भी कर सकती है।
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