कुरान - 36:70 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيّٗا وَيَحِقَّ ٱلۡقَوۡلُ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Liyunzira man kaana haiyanw-wa yahiqqal qawlu 'alal-kaafireen)

ताकि वह उसे डराए जो ज़िंदा दिल है [104], और काफ़िरों पर (अज़ाब की) बात साबित हो जाए [105]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 70

"ताकि वह उसे डराए जो ज़िंदा है [104], और काफ़िरों पर बात साबित हो जाए [105]!"

[104] ज़िंदा दिलों के लिए हिदायत

"ज़िंदा" से मुराद वह शख़्स है जिसका दिल ईमान और बसीरत के नूर से ज़िंदा है। क़ुरआन की दावत और नसीहत उसी पर असर करती है जो हक़ को क़बूल करने की सलाहीयत रखता है, जबकि काफ़िर रूहानी ऐतबार से मुर्दा हैं।

[105] काफ़िरों पर हुज्जत का तमाम होना

क़ुरआने पाक के वाज़ेह अहकामात के बाद मुनकिरीन के पास कोई उज़्र बाक़ी नहीं रहता। लिहाज़ा उन पर अल्लाह की हुज्जत तमाम हो गई और अज़ाब की वईद उन पर साबित हो चुकी।

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