कुरान - 36:71 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا خَلَقۡنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتۡ أَيۡدِينَآ أَنۡعَٰمٗا فَهُمۡ لَهَا مَٰلِكُونَ

Transliteration: (Awalam yaraw annaa khalaqnaa lahum mimmaa 'amilat aideenaaa an'aaman fahum lahaa maalikoon)

और क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाए हुए मवेशी (चौपाए) उनके लिए पैदा फ़रमाए [106], तो वे उनके मालिक बने बैठे हैं [107]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 71

"और क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाए हुए मवेशी उनके लिए पैदा फ़रमाए [106], तो वे उनके मालिक बने बैठे हैं [107]?"

[106] महज़ क़ुदरते इलाही से चौपायों की तख़्लीक़

"अपने हाथों से बनाए" का मतलब यह है कि चौपायों और मवेशियों को अल्लाह तआला ने अपनी ख़ास कु़दरत और इख़्तियार से पैदा फ़रमाया है, इसमें किसी मख़्लूक़ या बुत का कोई दख़ल नहीं।

[107] इंसान को तसर्रुफ़ और मिल्कियत का फ़ज़्ल

अल्लाह तआला ने इन चौपायों को इंसान के क़ब्ज़े और मिल्कियत में दे दिया ताकि वह उनसे सवारी, दूध और गोश्त का फ़ायदा उठाए। इंसान को चाहिए था कि वह इस पर अपने रब का शुक्रगुज़ार होता, न कि नाफ़रमान बनता।

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