कुरान - 36:75 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَهُمۡ وَهُمۡ لَهُمۡ جُندٞ مُّحۡضَرُونَ

Transliteration: (Laa yastatee'oona nasrahum wa hum lahum jundum muhdaroon)

वे (माबूद) उनकी मदद नहीं कर सकते, बल्कि वे (काफ़िर ख़ुद) उनके लश्कर बनकर हाज़िर किए जाएंगे [112]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 75

"वे उनकी मदद नहीं कर सकते, बल्कि वे उनके लश्कर बनकर हाज़िर किए जाएंगे [112]!"

[112] बुतों की बेबसी और मुशरिक़ीन की ज़िल्लत

पत्थर के तराशे हुए बुत किसी की क्या मदद करेंगे, वे तो अपनी मक्खी भी नहीं उड़ा सकते! क़ियामत के दिन वे बुत और उनके मुजाविर मुशरिक़ीन एक साथ जहन्नम में झोंके जाएंगे ताकि मुशरिक़ीन को मालूम हो जाए कि जिनके भरोसे वे बैठे थे, वे कितने बे-बस और लाचार थे।

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