कुरान - 36:76 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
فَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمۡۘ إِنَّا نَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَ

Transliteration: (Falaa yahzunka qawluhum; innaa na'lamu maa yusirroona wa maa yu'linoon)

पस (ऐ हबीब ﷺ!) उनकी बात आपको ग़मगीन न करे [113]; बेशक हम जानते हैं जो कुछ वे छुपाते हैं और जो कुछ वे ज़ाहिर करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 76

"पस उनकी बात आपको ग़मगीन न करे [113]; बेशक हम जानते हैं जो कुछ वे छुपाते हैं और जो कुछ वे ज़ाहिर करते हैं।"

[113] हुज़ूर अकरम ﷺ को तसल्ली-ए-इलाही

काफ़िर जब हुज़ूर अकरम ﷺ को जादूगर, शायर या मजनू कहते, तो हुज़ूर ﷺ के क़ल्बे मुबारक को रंज पहुंचता। अल्लाह तआला ने अपने हबीब ﷺ को तसल्ली दी कि ऐ महबूब! आप उनके बकवास से रंजीदा न हों। हम उनके दिल के निफ़ाक़ और ज़ाहिरी साज़िशों सब से बाख़बर हैं और हम उनसे पूरा-पूरा इंतिक़ाम लेंगे।

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