Transliteration: (Awalam yaral insaanu annaa khalaqnaahu min nutfatin fa-izaa huwa khaseemum mubeen)
"और क्या इंसान ने नहीं देखा कि हमने उसे नुत्फ़े से पैदा किया, फिर वह अचानक खुला झगड़ालू बन बैठा [114]?"
उबई बिन ख़लफ़ या आस बिन वायल जैसे काफ़िरों ने बोसीदा हड्डियां लाकर हुज़ूर ﷺ के सामने चूरा कीं और कहा कि क्या अल्लाह इन्हें दोबारा ज़िंदा करेगा? अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि इंसान अपनी हक़ीक़त भूल गया कि वह एक हक़ीर और गंदी बूंद से पैदा हुआ था। जिस ख़ुदा ने उस बूंद को जीता-जागता, बोलने और बहस करने वाला इंसान बना दिया, क्या वह उसे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता?
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