कुरान - 10:39 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
بَلۡ كَذَّبُواْ بِمَا لَمۡ يُحِيطُواْ بِعِلۡمِهِۦ وَلَمَّا يَأۡتِهِمۡ تَأۡوِيلُهُۥۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Bal kazzaboo bimaa lam yuheetoo bi'ilmihee wa lammaa ya'tihim ta'weeluh; kazaalika kazzabal lazeena min qablihim fanzur kaifa kaana 'aaqibatuz zaalimeen)

बल्कि बात यह है कि उन्होंने उस चीज़ को झुठला दिया जिसे वे अपने ज्ञान के घेरे में न ला सके और जिसकी वास्तविकता (अंतिम परिणाम) अभी उन पर प्रकट नहीं हुई। इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो इनसे पहले थे; तो देख लो कि ज़ालिमों का कैसा बुरा अंत हुआ! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 39 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अज्ञानता के कारण सत्य का इन्कार

इंसान की अज्ञानता का स्वभाव है कि जिस गूढ़ रहस्य या परलोक की बात को उसकी संकुचित बुद्धि तुरंत नहीं समझ पाती, वह बिना सोचे-समझे उसे नकार देता है। पिछली क़ौमों ने भी यही ग़लती की थी और अंततः अल्लाह के अज़ाब में नष्ट हो गईं।

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