कुरान - 10:37 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَمَا كَانَ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانُ أَن يُفۡتَرَىٰ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَٰكِن تَصۡدِيقَ ٱلَّذِي بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَتَفۡصِيلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا رَيۡبَ فِيهِ مِن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maa kaana haazal Qur'aanu ai yuftaraa min doonil laahi wa laakin tasdeeqal lazee baina yadaihi wa tafseelal Kitaabi laa raiba feehee mir Rabbil 'aalameen)

और यह क़ुरआन ऐसा नहीं है कि अल्लाह (की वह्य) के बिना इसे गढ़ लिया जाए, बल्कि यह उन (किताबों) की पुष्टि करता है जो इससे पहले आई हैं और आसमानी किताब का विस्तृत विवरण है, इसमें कोई संदेह नहीं; यह सारे जहानों के रब की ओर से है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 37 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़ुरआन का ईश्वरीय मूल

यह महान ग्रंथ किसी इंसान या कवि की कल्पना नहीं हो सकता। यह पूर्ववर्ती आसमानी ग्रंथों (तौरात, ज़बूर, इंजील) के मूल संदेश (तौहीद) की तस्दीक़ करता है और इंसानी जीवन के लिए आवश्यक धार्मिक व नैतिक नियमों का विस्तृत विवरण देता है।

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