कुरान - 10:36 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَمَا يَتَّبِعُ أَكۡثَرُهُمۡ إِلَّا ظَنًّاۚ إِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغۡنِي مِنَ ٱلۡحَقِّ شَيۡـًٔاۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa maa yattabi'u aksaruhum illaa zannaa; innaz zanna laa yughnee minal haqqi shai'aa; innal laaha 'Aleemun bimaa yaf'aloon)

और उनमें से अधिकांश लोग केवल अटकल (गुमान/अंदाज़े) के पीछे चलते हैं; निस्संदेह, अटकल सत्य के मुक़ाबले में तनिक भी काम नहीं आती। बेशक अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ वे करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 36 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] शिर्क और कुफ़्र केवल वहम व गुमान पर आधारित हैं

मुशरिकीन के पास अपने झूठे देवताओं के पूज्य होने का कोई तार्किक प्रमाण या आसमानी किताब नहीं थी; उनका पूरा धर्म केवल बाप-दादा के रस्मोरिवाज और अंदाज़ों पर टिका था। लेकिन धर्म और अक़ीदा केवल ठोस सत्य और ईश्वरीय वह्य पर ही आधारित हो सकता है।

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