कुरान - 10:35 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
قُلۡ هَلۡ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلۡحَقِّۚ قُلِ ٱللَّهُ يَهۡدِي لِلۡحَقِّۗ أَفَمَن يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلۡحَقِّ أَحَقُّ أَن يُتَّبَعَ أَمَّن لَّا يَهِدِّيٓ إِلَّآ أَن يُهۡدَىٰۖ فَمَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ

Transliteration: (Qul hal min shurakaaa 'ikum mai yahdeee ilal haqq; qulil laahu yahdee lilhaqq; afamai yahdeee ilal haqqi ahaqqu ai yuttaba'a ammal laa yahiddeee illaaa ai yuhdaa famaa lakum kaifa tahkumoon)

आप पूछिए, "क्या तुम्हारे साझीदारों में कोई ऐसा है जो सत्य का मार्ग दिखाता हो?" कह दीजिए, "केवल अल्लाह ही सत्य का मार्ग दिखाता है। तो क्या जो सत्य की राह दिखाता है वह इसके अधिक योग्य है कि उसका अनुसरण किया जाए या वह जो स्वयं रास्ता नहीं पाता जब तक कि उसे रास्ता न दिखाया जाए? तो तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय करते हो?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 35 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हिदायत (मार्गदर्शन) का स्रोत

सच्चा पथ-प्रदर्शक केवल वही हो सकता है जिसके पास पूर्ण ज्ञान, सत्य और सृष्टि का संपूर्ण अधिकार हो। बेजान मूर्तियां तो स्वयं अपने स्थान से हिलने के लिए भी दूसरों की मोहताज हैं। बुद्धि का तकाज़ा है कि केवल उसी की पैरवी की जाए जो समस्त ब्रह्मांड को हिदायत देता है।

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