कुरान - 10:33 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
كَذَٰلِكَ حَقَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى ٱلَّذِينَ فَسَقُوٓاْ أَنَّهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Kazaalika haqqat Kalimatu Rabbika 'alal lazeena fasaqooo annahum laa yu'minoon)

इसी प्रकार आपके रब की यह बात नाफ़रमानों पर सच साबित होकर रही कि वे ईमान नहीं लाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 33 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] निरंतर हठधर्मिता पर मुहर

जो लोग जानबूझकर सत्य का विरोध करते हैं और बार-बार नसीहत के बावजूद नाफ़रमानी पर अड़े रहते हैं, उनके दिलों पर उनकी अपनी बदनीयती के कारण मुहर लग जाती है और वे ईमान से वंचित रह जाते हैं।

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