कुरान - 10:31 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
قُلۡ مَن يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ أَمَّن يَمۡلِكُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَمَن يُخۡرِجُ ٱلۡحَيَّ مِنَ ٱلۡمَيِّتِ وَيُخۡرِجُ ٱلۡمَيِّتَ مِنَ ٱلۡحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ ٱلۡأَمۡرَۚ فَسَيَقُولُونَ ٱللَّهُۚ فَقُلۡ أَفَلَا تَتَّقُونَ

Transliteration: (Qul mai yarzuqukum minas samaaa'i wal ardi ammany yamlikus sam'a wal absaara wa mai yukhrijul haiya minal maiyiti wa yukhrijul maiyita minal haiyi wa mai yudabbirul amr; fasa yaqooloonal laah; faqul afalaa tattaqoon)

आप पूछिए, "कौन तुम्हें आसमान और ज़मीन से रोज़ी देता है? या कानों और आँखों पर किसका पूर्ण अधिकार है? और कौन बेजान में से जानदार को निकालता है और जानदार में से बेजान को निकालता है? और पूरे ब्रह्मांड की व्यवस्था (प्रबंधन) कौन करता है?" वे तुरंत कहेंगे, "अल्लाह!" तो कह दीजिए, "फिर क्या तुम (उसका) डर नहीं रखते?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 31 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] तौहीद-ए-रुबूबियत से तौहीद-ए-इबादत का अकाट्य तर्क

मक्का के मुशरिक भी यह मानते थे कि आकाश और धरती का सृष्टा, वर्षा बरसाने वाला, जीवन और मृत्यु देने वाला और ब्रह्मांड का स्वामी केवल अल्लाह है। क़ुरआन ने इसी बात को आधार बनाकर तर्क दिया: जब तुम मानते हो कि सब कुछ करने वाला अकेला अल्लाह है, तो फिर इबादत, दुआ और बंदगी में दूसरों को क्यों साझीदार बनाते हो?

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