कुरान - 10:30 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
هُنَالِكَ تَبۡلُواْ كُلُّ نَفۡسٖ مَّآ أَسۡلَفَتۡۚ وَرُدُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ مَوۡلَىٰهُمُ ٱلۡحَقِّۖ وَضَلَّ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

Transliteration: (Hunaalika tabloo kullu nafsin maaa 'aslafat; wa ruddoo ilal laahi mawlaahumul haqqi wa dalla 'anhum maa kaanoo yaftaroon)

वहाँ हर व्यक्ति उस कर्म का प्रत्यक्ष अनुभव कर लेगा जो उसने पहले किया था, और वे सब अल्लाह की ओर लौटाए जाएंगे जो उनका सच्चा मालिक है, और जो झूठ वे गढ़ते रहे थे वह सब उनसे गुम हो जाएगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 30 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] आमाल का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण

क़यामत के दिन हर आत्मा अपने हर छोटे-बड़े नेक और बद अमल का नतीजा अपनी आँखों से देख लेगी। दुनिया के सारे मनगढ़ंत देवता, झूठी शफ़ाअत के दावे और ग़लत विश्वास सब ग़ायब हो जाएंगे और केवल अल्लाह का सच्चा आधिपत्य सामने होगा।

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