कुरान - 10:28 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَيَوۡمَ نَحۡشُرُهُمۡ جَمِيعٗا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ مَكَانَكُمۡ أَنتُمۡ وَشُرَكَآؤُكُمۡۚ فَزَيَّلۡنَا بَيۡنَهُمۡۖ وَقَالَ شُرَكَآؤُهُم مَّا كُنتُمۡ إِيَّانَا تَعۡبُدُونَ

Transliteration: (Wa yawma nahshuruhum jamee'an thumma naqoolu lil lazeena ashrakoo makaanakum antum wa shurakaaa'ukum; fazaiyalnaa bainahum wa qaala shurakaaa'uhum maa kuntum iyyaanaa ta'budoon)

और जिस दिन हम उन सबको एक साथ इकट्ठा करेंगे, फिर हम मुशरिकीन (शिर्क करने वालों) से कहेंगे, "अपनी जगह ठहरे रहो, तुम भी और तुम्हारे बनाए हुए साझीदार (बुत/देवी-देवता) भी!" फिर हम उनके बीच अलगाव (फ़र्क) कर देंगे, और उनके साझीदार उनसे कहेंगे, "तुम हमारी पूजा तो नहीं करते थे!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 28 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हश्र के मैदान में मुशरिकीन और उनके पूज्यों का आमना-सामना

क़यामत के दिन अल्लाह तआला न्याय की अदालत में मुशरिकों और उन तमाम हस्तियों, फ़रिश्तों या बुतों को सामने खड़ा करेगा जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे।

✅ [2] पूज्यों द्वारा पूजा का स्पष्ट इन्कार

वे पूज्य साफ़ कह देंगे कि हमने तुम्हें कभी अपनी पूजा करने का हुक्म नहीं दिया था; तुम तो असल में अपनी ही मनमर्जी और शैतानी ख़्वाहिशात के पीछे लगे हुए थे।

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