कुरान - 10:27 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَٱلَّذِينَ كَسَبُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ جَزَآءُ سَيِّئَةِۭ بِمِثۡلِهَا وَتَرۡهَقُهُمۡ ذِلَّةٞۖ مَّا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِنۡ عَاصِمٖۖ كَأَنَّمَآ أُغۡشِيَتۡ وُجُوهُهُمۡ قِطَعٗا مِّنَ ٱلَّيۡلِ مُظۡلِمًاۚ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wallazeena kasabus saiyi aati jazaaa'u saiyi'atin bimislihaa wa tarhaquhum zillah; maa lahum minal laahi min 'aasimin ka annamaaa ughshiyat wujoohuhum qita'an minal laili muzlimaa; ulaaa'ika Ashaabun Naari hum feeha khaalidoon)

और जिन लोगों ने बुराइयां कमाईं, तो बुराई का बदला उसी के बराबर है और उन पर ज़िल्लत (अपमान) छा जाएगी। उन्हें अल्लाह (की पकड़) से बचाने वाला कोई न होगा; (उनके चेहरे ऐसे काले होंगे) मानो उनके चेहरों पर अंधेरी रात की परतें चढ़ा दी गई हों! वही दोज़ख़ वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 27 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बुराई का बराबर बदला और न्याय

अल्लाह का न्याय है कि भलाई का बदला दस गुना से लेकर अनगिनत गुना तक दिया जाता है, लेकिन गुनाह की सज़ा केवल गुनाह के बराबर ही दी जाती है, उससे अधिक नहीं।

✅ [2] मुजरिमों के चेहरों पर स्याही और ज़िल्लत

गुनाहगारों के चेहरों पर बदहवासी, अपमान और घोर अंधेरा छाया होगा, मानो काली स्याह रात के टुकड़े उनके चेहरों पर लपेट दिए गए हों, और कोई शक्ति उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकेगी।

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