कुरान - 10:26 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
۞لِّلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ ٱلۡحُسۡنَىٰ وَزِيَادَةٞۖ وَلَا يَرۡهَقُ وُجُوهَهُمۡ قَتَرٞ وَلَا ذِلَّةٌۚ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Lil lazeena ahsanul husnaa wa ziyaadatunw wa laa yarhaqu wujoohahum qatarunw wa laa zillah; ulaaa'ika ashaabul jannati hum feehaa khaalidoon)

उन लोगों के लिए जिन्होंने भलाई (नेक काम) की, उत्तम बदला (जन्नत) है और उससे भी अधिक (ज़ियादत)। उनके चेहरों पर न तो कोई कालिख (उदासी) छाएगी और न कोई अपमान। वही जन्नत वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 26 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] “हुस्ना” और “ज़ियादत” (अल्लाह का दीदार)

सहीह मुस्लिम की हदीस के अनुसार, रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि 'हुस्ना' से मुराद जन्नत है, और 'ज़ियादत' (अतिरिक्त नेमत) से मुराद अल्लाह तआला का प्रत्यक्ष दीदार (दर्शन) है। जब जन्नती जन्नत में दाख़िल हो जाएंगे, तो पर्दा हटा दिया जाएगा और जन्नत वालों को अपने रब के दीदार से बढ़कर कोई नेमत प्यारी नहीं लगेगी।

✅ [2] चेहरे पर नूर और सम्मान

क़यामत के दिन ईमान वालों के चेहरे नूर से चमक रहे होंगे; उन पर किसी प्रकार का भय, उदासी या ज़िल्लत का कोई निशान नहीं होगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now