कुरान - 10:29 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
فَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدَۢا بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمۡ إِن كُنَّا عَنۡ عِبَادَتِكُمۡ لَغَٰفِلِينَ

Transliteration: (Fakafaa billaahi shaheedan bainanaa wa bainakum in kunnaa 'an 'ibaadatikum laghaafileen)

"अतः हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह ही गवाह के रूप में काफ़ी है कि हमें तुम्हारी पूजा-अर्चना की कोई ख़बर तक न थी!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 29 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह की गवाही और झूठी उम्मीदों का टूटना

यदि वे पूज्य बेजान बुत थे, तो वे सुनने-जानने से पूरी तरह बेख़बर थे; और यदि वे नेक इंसान या फ़रिश्ते थे, तो वे शिर्क से पूरी तरह बेज़ार और निर्दोष थे। इस प्रकार मुशरिकीन की आख़िरी उम्मीद भी धूल में मिल जाएगी।

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