कुरान - 10:93 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

93
وَلَقَدۡ بَوَّأۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ مُبَوَّأَ صِدۡقٖ وَرَزَقۡنَٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ فَمَا ٱخۡتَلَفُواْ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلۡعِلۡمُۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Wa laqad bawwa'naa Baneee Israaa'eela mubawwa 'a sidqinw wa razaqnaahum minat taiyibaati fa makhtalafoo hattaa jaaa'ahmul 'ilm; inna Rabbaka yaqdee bainahum Yawmal Qiyaamati feemaa kaanoo feehi yakhtalifoon)

और निस्संदेह, हमने बनी इसराईल को सम्मानजनक स्थान (शाम व फ़िलिस्तीन की धरती) पर बसाया और उन्हें पवित्र चीज़ों की रोज़ी अता की; फिर उन्होंने उस समय तक मतभेद नहीं किया जब तक कि उनके पास ज्ञान न आ गया। बेशक आपका रब क़यामत के दिन उनके बीच उस बात का फ़ैसला कर देगा जिसमें वे मतभेद करते रहे थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 93 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 93 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बनी इसराईल पर अल्लाह की नेमतें और उनका आपसी मतभेद

फ़िरऔन के चंगुल से आज़ाद कराने के बाद अल्लाह ने बनी इसराईल को पवित्र भूमि में बसाया और उत्तम रिज़्क़ दिया। लेकिन अज्ञानता के कारण नहीं, बल्कि हसद, अहंकार और स्वार्थ के कारण जब उनके पास किताब का इल्म आ गया, तब उन्होंने दीन में मतभेद और दल-बदल शुरू कर दिए।

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