कुरान - 44:21 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَإِن لَّمۡ تُؤۡمِنُواْ لِي فَٱعۡتَزِلُونِ

Transliteration: (Wa il lam tu'minoo lee fa'taziloon)

और "अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाते, तो मुझसे अलग हो जाओ [22]"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 21

"और 'अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाते, तो मुझसे अलग हो जाओ [22]'।"

[22] किनाराकशी और अदम-ए-मुदाख़लत की नसीहत

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि अगर तुम मेरी रिसालत पर ईमान नहीं लाते और अल्लाह की वहदानियत को तस्लीम नहीं करते, तो कम से कम मुझे क़त्ल करने, पत्थर मारने या तकलीफ़ पहुँचाने के दरपे न हो, बल्कि मुझसे अलग-थलग (किनाराकश) रहो।

यह उसूल वाज़ेह करता है कि दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं और अंबिया का मक़सद दावत-ए-हक़ पहुँचाना होता है। अगर कोई बदक़िस्मत ईमान न लाए, तो उसे कम से कम हक़ की राह में रुकावट बनने और अल्लाह के पैग़म्बर को सताने से बाज़ रहना चाहिए, ताकि वह दुनियावी व उख़रवी हलाकत से बच सके।

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