Transliteration: (Fa asri bi'ibaadee lailan innakum muttaba'oon)
"(हुक्म हुआ) 'तो मेरे बंदों को रात के वक़्त ले निकलो, बेशक तुम्हारा पीछा किया जाएगा [23]'।"
इस आयत में अल्लाह तआला का हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को बराहे-रास्त हुक्म दर्ज है कि वे बनी इसराईल को लेकर रात के वक़्त मिस्र से निकल पड़ें। रात की तारीकी में सफ़र का हुक्म एक अज़ीम इलाही हिकमत के तहत था: ताकि बनी इसराईल आगे निकल जाएं और सुबह की रौशनी में फ़िरऔनी लश्कर उनका पीछा करे, और आख़िरकार बहर-ए-अहमर (लाल सागर) में उनकी हलाकत का सामान पूरा हो।
तारीख़ी रिवायतों के मुताबिक़ यह वाक़िया दसवीं मुहर्रमुल हराम (यौमे आशूरा) की शब को पेश आया—जो तारीख़ी और रूहानी एतबार से बड़ी अज़ीम रात है।
रात के सफ़र के ज़रिए अल्लाह तआला ने अपनी नजात और इंतिक़ाम की तदबीर को पूरा फ़रमाया: बनी इसराईल को ज़ुल्म से आज़ादी मिली, और फ़िरऔन व उसके लश्कर को हमेशा की इबरतनाक मौत दे दी गई।
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