कुरान - 44:22 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ قَوۡمٞ مُّجۡرِمُونَ

Transliteration: (Fada'aa rabbahooo anna haaa'ulaaa'i qawmum mujrimoon)

फिर उन्होंने अपने रब से फ़रियाद की कि: "ये मुजरिम लोग हैं"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 22

"फिर उन्होंने अपने रब से फ़रियाद की कि: 'ये मुजरिम लोग हैं'।"

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़

जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने हर तरह की नसीहत, मोजिज़ात और वाज़ेह दलीलों को ठुकरा दिया और सरकशी व ज़ुल्म पर अड़े रहे, तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़ की कि ये लोग किसी क़ीमत पर ईमान लाने वाले नहीं बल्कि पक्के मुजरिम हैं। चुनांचे हुक्मे इलाही नाज़िल होने का वक़्त आ पहुँचा।

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