Transliteration: (Fada'aa rabbahooo anna haaa'ulaaa'i qawmum mujrimoon)
"फिर उन्होंने अपने रब से फ़रियाद की कि: 'ये मुजरिम लोग हैं'।"
जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने हर तरह की नसीहत, मोजिज़ात और वाज़ेह दलीलों को ठुकरा दिया और सरकशी व ज़ुल्म पर अड़े रहे, तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़ की कि ये लोग किसी क़ीमत पर ईमान लाने वाले नहीं बल्कि पक्के मुजरिम हैं। चुनांचे हुक्मे इलाही नाज़िल होने का वक़्त आ पहुँचा।
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