कुरान - 44:24 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
وَٱتۡرُكِ ٱلۡبَحۡرَ رَهۡوًاۖ إِنَّهُمۡ جُندٞ مُّغۡرَقُونَ

Transliteration: (Watrukil bahra rahwan innahum jundum mughraqoon)

और दरिया को ठहरा हुआ (खुला) छोड़ दो [24]; बेशक वे ऐसा लश्कर हैं जो ग़र्क़ किया जाएगा [25]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 24

"और दरिया को ठहरा हुआ (खुला) छोड़ दो [24]; बेशक वे ऐसा लश्कर हैं जो ग़र्क़ किया जाएगा [25]।"

[24] दरिया के रास्तों को खुला रखने का हुक्म

यह हुक्म हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को उस वक़्त दिया गया जब आप और बनी इसराईल मोजिज़ाती तौर पर बने हुए सूखे रास्तों से बहर-ए-अहमर को ब-हिफ़ाज़त पार कर चुके। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने चाहा कि अपनी लाठी मारकर दरिया को फिर मिला दें ताकि दुश्मन पीछे न आ सके, मगर अल्लाह ने हुक्म फ़रमाया कि दरिया को उसी तरह ठहरा हुआ और रास्ते खुले रहने दो ताकि फ़िरऔन और उसका लश्कर भी लालच में आकर दरिया में उतर पड़े।

जब पूरा लश्कर दरिया के बीचों-बीच पहुँच गया, तो पानी को आपस में मिल जाने का हुक्म हुआ और वे सब के सब एक साथ ग़र्क़ हो गए।

इस तरह जिस दरिया और पानी पर फ़िरऔन नाज़ करता था, अल्लाह ने उसी पानी को उसकी हलाकत और ज़िल्लत का ज़रिया बना दिया।

[25] हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को अता किया गया इल्म-ए-ग़ैब

यह आयत वाज़ेह फ़रमाती है कि अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को फ़िरऔन के डूबने की जगह, वक़्त और उसकी हलाकत की पूरी कैफ़ियत पहले ही बता दी थी।

यह मुकम्मल इल्म इल्म-ए-ग़ैब के दायरे में आता है। इससे साबित हुआ कि अल्लाह तआला अपने नबियों को अपनी अता से ग़ैब की बातों पर मुत्तला फ़रमाता है। दुनिया की कोई बड़ी से बड़ी ताक़त अल्लाह के हुक्म और उसके रसूल के मुक़ाबले में नहीं ठहर सकती।

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