कुरान - 44:26 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَزُرُوعٖ وَمَقَامٖ كَرِيمٖ

Transliteration: (Wa zuroo'inw wa maqaa min kareem)

और खेतियाँ और शानदार महल [26]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 26

"और खेतियाँ और शानदार महल [26]।"

[26] पीछे छूटी हुई दुनियावी शान-ओ-शौकत

यह आयत उस दुनियावी ठाठ-बाट को उजागर करती है जिस पर फ़िरऔन और उसकी क़ौम घमंड करते थे। उनके पास सरसब्ज़ खेतियाँ, ख़ूबसूरत वसीअ मकानात और आलीशान महल थे। मिस्र का तमद्दुन उस ज़माने में दौलत और हुस्न-ए-तामीर का बेहतरीन नमूना था, मगर रूहानी एतबार से वे बिल्कुल खोखले और बर्बाद थे।

इतनी नेअमतों के बावजूद उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल से बगावत की, जिससे साबित हुआ कि दौलत और मकानात की फ़रावानी इंसान की हक़्क़ानियत की दलील नहीं होती।

फ़िरऔन के तबाह होने के बाद ये तमाम महल, खेतियाँ और बाग़ात बनी इसराईल के क़ब्ज़े में आ गए—यानी वही मक़हूर और मज़लूम क़ौम जिसे कल तक फ़िरऔनी अपना ग़ुलाम समझते थे। यह अल्लाह के कामिल इंसाफ़ का इज़हार है कि उसने ज़ालिमों की सल्तनत छीनकर मज़लूमों के हवाले कर दी।

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