Transliteration: (Wa innee 'uztu bi Rabbee wa rabbikum an tarjumoon)
"और 'मैं अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह लेता हूँ इससे कि तुम मुझे संगसार [21] करो'।"
इस आयत में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन और उसके दरबारियों की उन धमकियों का जवाब दिया, जिन्होंने आपको पत्थरों से मार डालने (संगसार करने) की धमकी दी थी। इस ख़तरे के सामने आपने किसी दुनियावी ताक़त या ख़ौफ़ का सहारा नहीं लिया, बल्कि अल्लाह की पनाह में आने का ऐलान फ़रमाया।
फ़रमाया “मेरे रब और तुम्हारे रब की पनाह”—इसमें फ़िरऔन को याद दिलाया गया कि अल्लाह सिर्फ़ कमज़ोरों का नहीं बल्कि तुम्हारा भी रब और मालिक है। अगर तुम उसका इनकार भी करो, तब भी तुम्हारी ज़िंदगी और मौत उसी के क़ब्ज़े में है।
यह अंबिया-ए-किराम की अज़ीम सुन्नत है कि वे दुनियावी ताक़तों की परवाह किए बिना सिर्फ़ अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा रखते हैं और दुश्मनों की धमकियों का जवाब पुरवक़ार और पुरअम्न तरीक़े से देते हैं।
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