कुरान - 44:30 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
وَلَقَدۡ نَجَّيۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ مِنَ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡمُهِينِ

Transliteration: (Wa laqad najjainaa Baneee Israaa'eela minal'azaabil muheen)

और बेशक हमने बनी इसराईल को रुसवाकुन अज़ाब [30] से नजात दी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 30

"और बेशक हमने बनी इसराईल को रुसवाकुन अज़ाब [30] से नजात दी।"

[30] फ़िरऔनी ज़ुल्म व रुसवाई से नजात

रुसवाकुन अज़ाब से मुराद वह ज़िल्लत-आमेज़ और अमानवीय सुलूक था जो फ़िरऔन बनी इसराईल से करवाता था। उनके मर्दों से कूड़ा उठाने, झाड़ू देने और नापाकियों को साफ़ करने जैसी सख़्त और रुसवाकुन मज़दूरी कराई जाती थी, जबकि उनकी औरतों को कनीज़ बनाकर अपने घरों में नौकरानियों की तरह रखा जाता था। इसके अलावा उनके नवजात बेटों को बेरहमी से क़त्ल कर दिया जाता था।

अल्लाह तआला ने अपनी अज़ीम रहमत से उन्हें इस रुसवाई से आज़ाद फ़रमाया और उनके दुश्मनों को ग़र्क़ कर दिया। यह इस बात का सबूत है कि ज़ालिम दुश्मनों के चंगुल से नजात मिलना अल्लाह तआला का बहुत बड़ा एहसान और इनाम है।

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