Transliteration: (Fa'too bi aabaaa'inaaa inkuntum saadiqeen)
"'अगर तुम सच्चे हो तो हमारे (मुर्दा) बाप-दादाओं को ज़िंदा कर दिखाओ [37]'।"
मुनकिरीन ने क़ियामत और दोबारा उठाए जाने का मज़ाक़ उड़ाते हुए यह मुतालबा किया कि अगर तुम सच्चे हो तो हमारे गुज़रे हुए बुज़ुर्गों को अभी इसी वक़्त ज़िंदा करके हमारे सामने ले आओ।
यह मुतालबा बिल्कुल ऐसा ही बेतुका था जैसे कोई शख़्स किसी नए लगाए गए पौधे से उसी वक़्त फल देने का तकाज़ा करने लगे, इस हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करते हुए कि हर काम का एक मुक़र्ररा वक़्त होता है। उनका यह सवाल हक़ की तलाश नहीं बल्कि महज़ तकब्बुर और जिहालत का इज़हार था।
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