कुरान - 51:11 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي غَمۡرَةٖ سَاهُونَ

Transliteration: (Allazeena hum fee ghamratin saahoon)

वे जो ग़फ़लत की गहराई में [10] बेख़बर भटके हुए हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 11

"वे जो ग़फ़लत की गहराई में [10] बेख़बर भटके हुए हैं।"


[10] ग़फ़लत और दुनिया के नशे

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इंसान कई तरह के नशों और ग़फ़लतों में मुब्तला होकर हक़ से दूर हो जाता है:

  • जहालत का नशा: कुछ लोग अपनी नासमझी और जहालत के नशे में चूर होकर हक़ से बेख़बर रहते हैं।
  • बे-अमल इल्म का नशा: कुछ लोग दुनियावी तालीम और इल्म के नशे में तो होते हैं, लेकिन उनका दिल रूहानी हिदायत और मारिफ़त से ख़ाली होता है।
  • दौलत व ताक़त का नशा: कुछ लोग माल व दौलत और हुकूमत व ओहदे के नशे में तकब्बुर का शिकार होकर अल्लाह के अहकाम को भुला देते हैं।
  • इलाही ताकीद: यह आयत मोमिनों को इन तमाम नशों से बचने और दिल में आजिज़ी व रूहानी बेदारी पैदा करने की नसीहत फ़रमाती है।

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