Transliteration: (Qutilal kharraasoon)
"हलाकत हो अटकलें दौड़ाने वाले झूठे लोगों पर!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'ख़र्रासून' उन झूठे और बे-बुनियाद अंदाज़े लगाने वालों को कहा गया है जो बिना किसी इल्म व दलील के दीन, आख़िरत और नबी ﷺ की शान में मनघड़ंत कयासबाज़ियाँ करते हैं और अपनी अटकलों से लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।
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