कुरान - 51:9 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
يُؤۡفَكُ عَنۡهُ مَنۡ أُفِكَ

Transliteration: (Yu'faku 'anhu man ufik)

इस (क़ुरआन व रसूल) से वही मुँह फेरता है [9] जो ख़ुद ही फेर दिया गया हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 9

"इस (क़ुरआन व रसूल) से वही मुँह फेरता है [9] जो ख़ुद ही फेर दिया गया हो।"


[9] क़ुरआन व रिसालत से महरूमी का सबब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • गुमराह करने वालों की नाकामी: मक्का के मुशरिकीन हक़ की तरफ़ माइल होने वाले लोगों को जादूगर या शायर कहकर बहकाने की कोशिश करते थे, लेकिन जिसकी क़िस्मत में ईमान लिखा था, वह उनके बहकावे में कभी नहीं आया।
  • नेअमतों की कुंजी: हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारका तमाम इलाही नेअमतों और रहमतों की कुंजी (चाबी) हैं। जो बदबख़्त आपकी बारगाह और क़ुरआने मजीद से मुँह फेर लेता है, वह हमेशा के लिए महरूम और नामुराद हो जाता है।

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