कुरान - 51:1 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلذَّـٰرِيَٰتِ ذَرۡوٗا

Transliteration: (Waz-zaariyaati zarwaa)

क़सम है उन हवाओं की जो (धूल और गर्द को) बिखेरकर उड़ाती हैं [1]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 1

"क़सम है उन हवाओं की जो (धूल और गर्द को) बिखेरकर उड़ाती हैं [1]!"


[1] बिखेरने वाली हवाओं की अज़मत व अहमियत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में अल्लाह तआला ने उन तेज़ हवाओं की क़सम खाई है जो धूल, रेत और ग़ुबार को दूर-दूर तक उड़ाकर बिखेर देती हैं:

  • चारों दिशाओं की हवाएं: यहाँ 'हवाओं' से मुराद चारों तरह की हवाएँ हैं—पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण (सबा, दब्बूर, शुमाल और जुनूब)—जिनके ज़रिए कुदरत का अज़ीम निज़ाम चलता है।
  • रब की क़ुदरत का इज़हार: धूल और गर्द का चारों तरफ़ फैल जाना हवाओं की असीम ताक़त और कायनात में काम करने वाली अनदेखी ताक़तों का इज़हार करता है।
  • इलाही अज़मत: जिस तरह तेज़ आंधियाँ और हवाएँ इंसानी क़ाबू से बाहर होकर दूर-दूर तक फैल जाती हैं, उसी तरह यह आयत अल्लाह तआला की बेमिसाल क़ुदरत और उसकी मुशीअत व इरादे की अज़मत को ज़ाहिर फ़रमाती है।

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