Transliteration: (Waz-zaariyaati zarwaa)
"क़सम है उन हवाओं की जो (धूल और गर्द को) बिखेरकर उड़ाती हैं [1]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत में अल्लाह तआला ने उन तेज़ हवाओं की क़सम खाई है जो धूल, रेत और ग़ुबार को दूर-दूर तक उड़ाकर बिखेर देती हैं:
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