Transliteration: (Wa innad deena la waaqi')
"और बेशक इंसाफ़ व बदला [6] होकर ही रहेगा!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन अल्लाह तआला का सच्चा इंसाफ़ बरपा होगा और हर शख़्स को उसके आमाल के मुताबिक़ हक़ीक़ी बदला मिलेगा:
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