कुरान - 51:6 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٞ

Transliteration: (Wa innad deena la waaqi')

और बेशक इंसाफ़ व बदला [6] होकर ही रहेगा! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 6

"और बेशक इंसाफ़ व बदला [6] होकर ही रहेगा!"


[6] अल्लाह तआला का अदल व इंसाफ़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन अल्लाह तआला का सच्चा इंसाफ़ बरपा होगा और हर शख़्स को उसके आमाल के मुताबिक़ हक़ीक़ी बदला मिलेगा:

  • फ़रमाँबरदारों के लिए: इताअतगुज़ार मोमिनों को जन्नत की दायमी नेअमतें और राहतें अता होंगी।
  • तौबा करने वालों के लिए: सच्ची तौबा करने वालों को अल्लाह की ख़ास रहमत व रज़ा हासिल होगी।
  • औलिया-ए-किराम के लिए: अल्लाह के नेक व मुक़र्रब बंदों को उसकी ख़ास क़ुरबत व कुर्ब नसीब होगा।
  • आरिफ़ीन के लिए: अल्लाह की मारिफ़त रखने वाले अहले दिल को दीदारे इलाही और वस्ल का अज़ीम शर्फ़ हासिल होगा।
  • तालिबीन के लिए: हक़ की तलाश में रहने वालों को रूहानी वज्द और सुरूर नसीब होगा।
  • ग़ाफ़िलों व नाफ़रमानों के लिए: हक़ से ग़फ़लत बरतने वालों और मुनकिरीन को दोज़ख़ की सज़ा भुगतनी पड़ेगी।

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