कुरान - 51:8 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
إِنَّكُمۡ لَفِي قَوۡلٖ مُّخۡتَلِفٖ

Transliteration: (Innakum lafee qawlim mukhtalif)

बेशक तुम (हक़ और रसूल के बारे में) आपस में उलझी हुई मुतज़ाद बातों [8] में पड़े हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 8

"बेशक तुम (हक़ और रसूल के बारे में) आपस में उलझी हुई मुतज़ाद बातों [8] में पड़े हो।"


[8] मुशरिकीन के मुतज़ाद और बे-बुनियाद अक़ीदे

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुशरिकीन की बातें और अक़ीदे आपस में बुरी तरह टकराते थे:

  • शिर्क में तज़ाद: कोई दो माबूद मानता था, कोई पचास, तो कोई तीन सौ साठ बुतों को पूजता था; उनका अपना कोई तयशुदा उसूल नहीं था।
  • रसूलुल्लाह ﷺ की शान में तज़ाद: हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-अक़दस के बारे में वे ख़ुद उलझन का शिकार थे: कभी जादूगर कहते, कभी शायर, तो कभी काहिन। उनका यह बार-बार बयान बदलना ख़ुद साबित करता है कि वे झूठ पर थे और उनके पास कोई दलील नहीं थी।

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