Transliteration: (Innakum lafee qawlim mukhtalif)
"बेशक तुम (हक़ और रसूल के बारे में) आपस में उलझी हुई मुतज़ाद बातों [8] में पड़े हो।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुशरिकीन की बातें और अक़ीदे आपस में बुरी तरह टकराते थे:
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