कुरान - 51:60 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن يَوۡمِهِمُ ٱلَّذِي يُوعَدُونَ

Transliteration: (Fawailul lillazeena kafaroo miny yawmihimul lazee yoo'adoon)

पस ख़राबी व हलाकत है काफ़िरों के लिए उनके उस दिन से, जिसका उनसे वादा किया जाता है [73]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 60

"पस ख़राबी व हलाकत है काफ़िरों के लिए उनके उस दिन से, जिसका उनसे वादा किया जाता है [73]!"


[73] काफ़िरों के लिए वईद का दिन

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जिस दिन का काफ़िरों से वादा किया गया है उससे तीन अज़ीम दिन मुराद हो सकते हैं:

  • जंग-ए-बदर का दिन: जहाँ काफ़िरों के बड़े-बड़े सरदार ज़िल्लत के साथ क़त्ल हुए और इस्लाम को फ़तह नसीब हुई।
  • उनकी मौत का दिन: जब अज़ाब के फ़रिश्ते उनकी रूहों को सख़्ती और ज़िल्लत से खींचते हैं।
  • क़यामत का दिन: जब तमाम काफ़िरों और मुशरिकों को हमेशा के लिए जहन्नम के दर्दनाक अज़ाब में डाल दिया जाएगा।

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