Transliteration: (Wa zakkir fa innaz zikraa tanfa'ul mu'mineen)
"और नसीहत फ़रमाते रहिए [64], क्योंकि नसीहत ईमान वालों को फ़ायदा पहुँचाती है [65]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुनकिरीन से मुँह फेरने के बावजूद दावत व तबलीग़ और नसीहत का सिलसिला बंद नहीं होगा; आप बराबर नसीहत फ़रमाते रहें क्योंकि यह दावत हमेशा जारी रहने वाली है।
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