कुरान - 51:54 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٖ

Transliteration: (Fatawalla 'anhum famaaa anta bimaloom)

पस (ऐ महबूब!) आप उनसे अपना रुख़ फेर लीजिए [62], अब आप पर कोई मलामत नहीं [63]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 54

"पस (ऐ महबूब!) आप उनसे अपना रुख़ फेर लीजिए [62], अब आप पर कोई मलामत नहीं [63]!"


[62] कुफ़्फ़ार की बे-हुदा बातों की परवाह न करना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को तसल्ली दी जा रही है कि आप इन हठधर्मियों की बे-हूदा बातों और झूठे इल्ज़ामों से रंजीदा न हों।
  • आप (ﷺ) ने अल्लाह का पैग़ाम पूरी अमानत के साथ पहुँचा दिया है; अब अगर कोई बदबख़्त इसे क़बूल नहीं करता, तो उसकी गुमराही की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है। यह हुक्म हमेशा के लिए महफ़ूज़ है।

[63] हुज़ूर अकरम ﷺ की बे-नियाज़ी और मख़लूक़ की मोहताजी

  • इस आयत में हुज़ूर अकरम ﷺ की मख़लूक़ से बे-नियाज़ी ज़ाहिर फ़रमाई गई है कि हुज़ूर ﷺ को मख़लूक़ की कोई ज़रूरत नहीं है।
  • बल्कि पूरी मख़लूक़ और कायनात आपकी मोहताज है, क्योंकि अल्लाह तआला ने हिदायत और नेअमतों की तक़सीम का ज़रिया हुज़ूर ﷺ ही की ज़ात-ए-अक़दस को बनाया है।

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