कुरान - 51:56 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَمَا خَلَقۡتُ ٱلۡجِنَّ وَٱلۡإِنسَ إِلَّا لِيَعۡبُدُونِ

Transliteration: (Wa maa khalaqtul jinna wal insa illaa liya'budoon)

और मैंने जिन्नों और इंसानों को सिर्फ़ इसीलिए पैदा किया कि वे मेरी इबादत करें [66]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 56

"और मैंने जिन्नों और इंसानों को सिर्फ़ इसीलिए पैदा किया कि वे मेरी इबादत करें [66]!"


[66] तख़लीक़-ए-इंस व जिन्न का हक़ीक़ी मक़सद: इबादत व मारिफ़त

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • इख़्तियारी इबादत: इंसान और जिन्नात की पैदाइश का अस्ल मक़सद अल्लाह तआला की इबादत और उसकी मारिफ़त हासिल करना है। इनकी इबादत 'इख़्तियारी' है, जिस पर जज़ा व सज़ा मुक़र्रर है।
  • तमाम कायनात की तस्बीह: कायनात की हर चीज़—हवा, पानी, दरख़्त, पहाड़—अल्लाह की तस्बीह करती है, लेकिन उनकी इबादत 'ग़ैर-इख़्तियारी' है जिस पर सवाब व अज़ाब नहीं।
  • जिन्नात की जज़ा व सज़ा: फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी के मुताबिक़ सरकश जिन्नात का ठिकाना जहन्नम है और मोमिन जिन्नों का इनाम दोज़ख़ से निजात पाना है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now