कुरान - 51:58 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلۡقُوَّةِ ٱلۡمَتِينُ

Transliteration: (Innal laaha Huwar Razzaaqu Zul Quwwatil Mateen)

बेशक अल्लाह ही बड़ा रोज़ी देने वाला (रज़्ज़ाक़) [69], बड़ी क़ुव्वत वाला, ज़बरदस्त क़ुदरत वाला है [70]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 58

"बेशक अल्लाह ही बड़ा रोज़ी देने वाला (रज़्ज़ाक़) [69], बड़ी क़ुव्वत वाला, ज़बरदस्त क़ुदरत वाला है [70]!"


[69] 'अर-रज़्ज़ाक़' की अज़मत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला तमाम मख़लूक़ात का हक़ीक़ी राज़िक़ है। वह माँ के पेट में पलने वाले नातवां बच्चे को भी रोज़ी पहुँचाता है जिसके पास कमाने की कोई सलाहियत नहीं होती; रोज़ी सिर्फ़ इंसानी मेहनत का नतीजा नहीं बल्कि अल्लाह का फ़ज़ल है।


[70] शैतान के मुक़ाबले में इलाही पनाह

अल्लाह तआला 'ज़ुल क़ुव्वतिल मतीन' है। इंसान का सबसे बड़ा और ताक़तवर दुश्मन शैतान है; सिर्फ़ अल्लाह की असीम ताक़त और उसकी पनाह ही इंसान को शैतानी हमलों से महफ़ूज़ रख सकती है।

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