कुरान - 51:53 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
أَتَوَاصَوۡاْ بِهِۦۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ طَاغُونَ

Transliteration: (Atawaasaw bih; bal hum qawmun taaghoon)

क्या वे एक दूसरे को इसकी वसीयत कर गए हैं? नहीं! बल्कि वे सब सरकश लोग [61] हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 53

"क्या वे एक दूसरे को इसकी वसीयत कर गए हैं? नहीं! बल्कि वे सब सरकश लोग [61] हैं।"


[61] सरकशी और कुफ़्र का मुश्तरका मिज़ाज

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • ज़माने और मुल्कों के फ़ासलों के बावजूद तमाम मुनकिरीन की ज़बान और बोली एक जैसी क्यों है? क्या उन्होंने एक दूसरे को वसीयत की थी? नहीं, बल्कि सबका बहकाने वाला एक ही है—इब्लीस (शैतान)।
  • उनकी सरकशी, तकब्बुर और हठधर्मी एक जैसी है, इसलिए हक़ के मुक़ाबले में सबकी बोली भी एक जैसी निकलती है।

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