कुरान - 51:4 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
فَٱلۡمُقَسِّمَٰتِ أَمۡرًا

Transliteration: (Falmuqassimaati amraa)

फिर (अल्लाह के) हुक्म से (रिज़्क़ व नेअमतों को) तक़सीम करने वाले फ़रिश्तों [4] की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 4

"फिर (अल्लाह के) हुक्म से (रिज़्क़ व नेअमतों को) तक़सीम करने वाले फ़रिश्तों [4] की!"


[4] तक़सीम करने वाले फ़रिश्ते और हुज़ूर ﷺ की शान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मुक़स्सिमात' से मुराद वे मुअज़्ज़ज़ फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के हुक्म से कायनात में नेअमतें और फ़ैसले तक़सीम करते हैं:

  • अहकाम व नेअमतों की तक़सीम: फ़रिश्तों की जमाअतें बारिश, रोज़ी (रिज़्क़), औलाद, और मौत के अहकाम को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ मख़लूक़ात के दरमियान बाँटती हैं।
  • चार बड़े फ़रिश्तों की ज़िम्मेदारियाँ:
    • हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम): वह्य और हवाओं के इंतिज़ाम पर मामूर हैं।
    • हज़रत मीकाईल (अलैहिस्सलाम): बारिश बरसाने और रिज़्क़ तक़सीम करने के ज़िम्मेदार हैं।
    • हज़रत इज़्राईल (अलैहिस्सलाम): रूहें क़ब्ज़ करने (मौत) के निज़ाम पर मुक़र्रर हैं।
    • हज़रत इस्राफ़ील (अलैहिस्सलाम): क़यामत के दिन सूर फूँकने के लिए तय्यार खड़े हैं।
  • हुज़ूर अकरम ﷺ बतौर क़ासिम (बाँटने वाले): हदीस शरीफ़ में हुज़ूर अकरम ﷺ ने फ़रमाया: "अल्लाह अता फ़रमाता है और मैं तक़सीम करता हूँ (वल्लाहु युअ़्ती व अना क़ासिम)"। अंबिया और फ़रिश्तों को अल्लाह की नेअमतें तक़सीम करने वाला मानना हरगिज़ शिर्क नहीं है, बल्कि यह अल्लाह तआला के इज़्ज़ व हुक्म का इज़हार है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now