Transliteration: (Falmuqassimaati amraa)
"फिर (अल्लाह के) हुक्म से (रिज़्क़ व नेअमतों को) तक़सीम करने वाले फ़रिश्तों [4] की!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'मुक़स्सिमात' से मुराद वे मुअज़्ज़ज़ फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के हुक्म से कायनात में नेअमतें और फ़ैसले तक़सीम करते हैं:
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