कुरान - 51:3 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
فَٱلۡجَٰرِيَٰتِ يُسۡرٗا

Transliteration: (Faljaariyaati yusraa)

फिर नर्मी व आसानी से तैरने वाली कश्तियों [3] की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 3

"फिर नर्मी व आसानी से तैरने वाली कश्तियों [3] की!"


[3] रवां-दवां कश्तियाँ और जहाज़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'जारियात' से मुराद समंदर के सीने पर तैरने वाली कश्तियाँ और जहाज़ हैं:

  • समंदर में आसानी से चलना: पानी की लहरों और तूफ़ानों के बीच भारी-भरकम जहाज़ों का निहायत नर्मी और सहूलत के साथ तैरना अल्लाह तआला की क़ुदरत की अज़ीम निशानी है।
  • मुसाफ़िरों और तिजारती सामान का नक़्ल व हमल: ये कश्तियाँ इंसानों को एक मुल्क से दूसरे मुल्क पहुँचाती हैं और भारी तिजारती माल व सामान ढोने का ज़रिया बनती हैं।
  • इलाही सहूलत व नेअमत: समंदर को इंसानों के ताबे करना और उस पर जहाज़ों को आसानी से चलाना अल्लाह तआला का बड़ा एहसान है, ताकि इंसानी ज़िंदगी में सहूलत और आसानी पैदा हो सके।
  • रिज़्क़ और तिजारत की फ़राहमी: इन कश्तियों के ज़रिए दुनिया भर में ज़रूरत की अशिया और ग़िज़ा की रसाई मुमकिन होती है, जो अल्लाह की रब्बानियत का जीता-जागता सुबूत है।

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