कुरान - 51:2 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
فَٱلۡحَٰمِلَٰتِ وِقۡرٗا

Transliteration: (Falhaamilaati wiqraa)

फिर (पानी का) बोझ उठाने वाले बादलों [2] की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 2

"फिर (पानी का) बोझ उठाने वाले बादलों [2] की!"


[2] बोझ उठाने वाले बादल और हवाएं

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हामिलात' से मुराद पानी से लदे हुए भारी बादल और उन्हें उठाने वाली हवाएँ हैं:

  • लाखों टन पानी का बोझ: ये हवाएँ और बादल अपने अंदर लाखों टन पानी समेटे हुए फ़ज़ा में उड़ते हैं, जो ज़मीन पर ज़िंदगी और हयात का सबसे बड़ा ज़रिया है।
  • बादलों को इकट्ठा करना: हवाएँ दरियाओं और समंदरों से भाप उठाकर उन्हें बादलों की शक्ल में मुत्तहिद करती हैं और जहाँ अल्लाह का हुक्म होता है, वहाँ बरसाती हैं।
  • रहमत और रोज़ी का ज़रिया: इन्हें 'बोझ उठाने वाली' इसलिए कहा गया क्योंकि वे ख़ुश्क और बंजर ज़मीन को सैराब करने के लिए भारी पानी का बोझ अपनी पीठ पर उठाकर ले जाती हैं।
  • इलाही हिकमत: हवाओं और बादलों का यह ज़िक्र अल्लाह तआला की ख़ास रहमत और उसकी पैदा की हुई रोज़ी की अज़मत को उजागर करता है।

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